अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की मांग की है

अखिल भारतीय विश्वविद्यालय  एवं महाविद्यालय  शिक्षक महासंघ ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर बिहार के शिक्षा जगत की विभिन्न फौरी समस्याओं के समाधान की  गुजारिश की है अब आशा। पत्र में उल्लेखित किया गया है  कि हम इस पत्र के माध्यम से विनम्रतापूर्वक आपका ध्यान पुनः एक बार बिहार के शिक्षा- जगत में मौजूद विभिन्न फौरी समस्याओं के साथ उनके  समाधान की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं । सम्बद्ध इंटर और डिग्री महाविद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले 6-7 वर्षों से अनुदान की देय राशि का भुगतान अकारण लम्बित रखा गया है।इणटर महाविद्यालय के शिक्षकों के लिए राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत 630 करोड़ की राशि का भुगतान भी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति(उच्च माध्यमिक )द्वारा रोक कर रखा गया है।राज्य के अनुदानित विद्यालयों के शिक्षकों की दशा अत्यंत दयनीय हो चुकी है क्योंकि सरकार ने अनुदान का भुगतान ही नहीं किया है।बिहार सरकार के इस संवेदनहीन रवैये से सम्बद्ध इणटर और डिग्री महाविद्यालयों और अनुदानित विद्यालयों के कई शिक्षक और कर्मचारी काल कलवित हो चुके हैं ।उनके लाखों परिवारजन किस विषम परिस्थितियों और संकट में वर्षों तक जीवनयापन करते रहे हैं । सरकार को भी मालूम है कि अनिश्चित भविष्य के लिए अभिशप्त इन्हीं शिक्षकों पर बिहार के करीब 70% छात्रों का भविष्य निर्भर  है।इन्हें अल्प बजट वृद्धि के द्वारा अनुदान के बदले वेतनमान देकर स्थायी समाधान आसानी से निकाला जा सकता है,केवल सरकार की इच्छा शक्ति की जरूरत है!


इसी प्रकार प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के नियोजित और नियमित लाखों शिक्षक पिछले 17 और 25 मार्च से अपनी न्यायसंगत माँगों के लिए हडताल पर हैं ।हडताल पर जाने के पूर्व शिक्षक संगठनों ने अनेक बार स्मारपत्र समर्पित कर बिहार सरकार और आपके द्वारा दिये गए आश्वासनों के कार्यान्वयन का अनुरोध किया।लेकिन सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गई ।अभी भी सरकार शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करके हडताल का समाधान निकालने के बजाय, हडताली शिक्षकों के खिलाफ निलंबन, बर्खास्तगी और झूठे मुकदमों में फॅसाने की अवांछित दमनात्मक कार्रवाई करने में मशगूल है।इतना ही नहीं सरकार ने उनका कार्यरत अवधि का वेतन भी रोक लिया है जो असंवैधानिक ही नहीं बल्कि अमानवीय भी है।
   
आदरणीय महोदय,


 कोरोना की वैश्विक महामारी के इस दौर में आपने प्रवासी मजदूरों, गरीब और असहाय लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशंसनीय कार्य किये हैं ।खासकर लाॅकडाउन में  फॅसे प्रवासी मजदूरों की आर्थिक मदद करने