इस्लाम में शबे बारात

इस्लाम धर्म में शब ए बारात यानी शब का अर्थ रात बारात का अर्थ बरी होना ,14 शाबान मोहजम का दिन गुजरने के बाद 15 वी तारीख की रात को शब ए बारात कहते हैं /2020 / 8 / 9/ तारीख को विश्व में मना रहे हैं । अल्लाह  के प्यारे रसूल सल्लल्लाहो आले वसल्लम ने फरमाया शाबान मेरा महीना है। हदीस के मानने वालों का कहना है अल्लाह तालाह से बढ़कर दूसरा कोई नहीं, अल्लाह के हुकुम की तामीर हुई शाबान मोहजम रात में जो बच्चा इस साल पैदा होगा या किसी की भी मौत होगी उसके गुनाहों की पेशी होगी । रिज़्क और जिंदगी का लेखा-जोखा इकट्ठा होगा ।दिल से गुनाहों की माफी मांगने वालों को अल्लाह पाक सल्लल्लाहो आले वसल्लम की सिफारिश से अल्लाह की रहमत हुई तो  15वीं तारीख अगली  साल तक पाक साफ हो जाएगा ।  जन्नत में जाने का रास्ता भी खुलता है कहा गया है लेकिन अल्लाह की मर्जी के बगैर कुछ भी नहीं है (रहमतों की रात नेकीयों का साथ गुनाहों से निजात) इस्लाम के मानने वालों के लिए यह रात बेहद फजीलत (महिमा )की रात मानी जाती है, इस रात पूरे विश्व के मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं । अरब देशों में लैलतुल बराह या लैलतुन निशफे मीन शाबान कहा जाता है भारत ,ईरान ,पाकिस्तान अफगानिस्तान ,नेपाल ,बांग्लादेश आदि में शब ए बारात कहा जाता है( महाशिवरात्रि व शब ए बारात) मनाने की परंपराएं एक जैसी नजर आती हैं इबादत, तिलावत ,सखावत (दान पुण्य अरदास) मस्जिदों,  कब्रिस्तानो में रौनक ज्यादा दिखाई देती है शहरों में जुलूस निकाले जाते हैं, घरों में भी अलग माहौल दिखाई देता है । नमाज ,कुरान तस्बीह दर्द शरीफ,  पूरी रात पढ़कर गुनाहों की माफी मांगी जाती है । सभी के लिए तरक्की, अमन चैन ,भाईचारे की दुआ की जाती है ।अपनी हैसियत के हिसाब से खैरात की जाती है । कब्रिस्तानो मैं मोमबत्तियां जलाकर अपने सगे संबंधियों को याद कर खुद को महसूस कर अल्लाह पाक से दुआ मांगते हैं। घरों में मुख्य पकवान, हलवा व खीर बनाकर दरूद और फतिया पढ़कर अपने बुजुर्गों को याद कर  रुखसत तक्सीम एक दूसरे को किया जाता है ।सवेरा होने पर कुछ हजरात रोजा रखते हैं( शिया सुन्नी देवबंदी बरेलवी ) अपने अपने तरीके से शब ए बरात को कुछ हजरात  त्योहार के रूप में मनाते हैं, कुछ गम और फिक्र में अल्लाह  से गुनाहों की माफी मांग कर सभी के लिए अमन-चैन तरक्की भाईचारे की दुआ मांगते हैं ।अल्लाह के प्यारे नबी ने फरमाया चार रातों में अल्लाह खैर खूब बहाता है। ईद उल अजहा की रात ,ईद उल फितर की रात , हज की रात, 15 वी तारीख की रात शब ए बारात अहम माना गया है ,क्योंकि इसमें नेकी गुनाह रिज़क और जिंदगी का लेखा-जोखा जिम्मेदार फरिश्तों व मलकुल  मौत तक पहुंचता है ।सभी देशवासियों को गुजारिश संदेश बीमारी ठीक करने के लिए (दवाई परेज दुआ) इन तीनों बातों को ध्यान में रखने से शिफा बहुत जल्दी मिलेगी। विश्व में कोरोनावायरस का भयंकर प्रकोप है, सरकार और डॉक्टरों के आदेशों- संदेशों का पालन कर अपना अहम योगदान देने में मुख्य भूमिका निभाए, सुरक्षित रहें । लॉक डाउन का पालन करें। खुशी मनाएं ,खुद को ,दूसरा को , देश को बचाएं ।डॉक्टर वह नर्स आदि मुख्य रोल अदा करने वाले अपनी जान की बाजी लगाने वालों को दिल की गहराइयों से सेल्यूट करें । मनोबल बढ़ाएं ,शासन प्रशासन - जनता की मजबूरियों और परेशानियों को समझें (मत बांटो अपने देश को छल -कपट, जाति -धर्म की नफरत से , बर्बादी के तूफान खड़े हो जाएंगे।  कंधे से कंधा मिला कर चलो, गिरते का हाथ पकड़ लो एक दूसरे का।   चारों तरफ तरक्की के अरमान खड़े हो जाएंगे )= जय जवान जय किसान जय भारत= भारतीय किसान यूनियन (भानु ) प्रदेश सचिव (चौधरी शौकत अली चेची )