जबलपुर की पार्वती चाची की अर्थी को इनायत अली ने कांधा देकर पैगंबर मोहम्मद साहब के संदेश को आगे बढ़ाया है- मंसूरी

जमुनी तहजीब को तार-तार करने के  प्रयास कर हिंदू मुस्लिम के बीच नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं,वही मुस्लिम समाज के लोग मोहम्मद साहब के संदेशों को अपनाते हुए इस्लाम मजहब के किरदार से फिरकापरसती की आग से मुल्क को बचाने में लगे हैं।
श्री मंसूरी ने कहा जिसके तहत इंदौर मध्य प्रदेश की दुर्गा की अर्थी को इमरान और उनके साथी कांधा देखकर अंतिम संस्कार करवाते हैं। वहीं दूसरी ओर जबलपुर की पार्वती चाची की अर्थी को इनायत अली का कांधा नसीब होता है।
श्री मंसूरी ने कहा मध्य प्रदेश के शहर जबलपुर स्थित एमजीएम कॉलोनी निवासी बुजुर्ग महिला का निधन होने पर मुस्लिम समाज के लोगों ने अंतिम संस्कार करा कर सर्वधर्म सदभाव की मिसाल पेश की। श्री मंसूरी ने कहा एमजीएम कॉलोनी निवासी 80 वर्षीय पार्वती का मंगलवार दोपहर 12:00 बजे निधन हो गया पार्वती की बेटी शवेता ने अपने रिश्तेदारों को फोन पर पार्वती की मृत्यु की सूचना दी परंतु 2 घंटे बीतने के बाद भी कोरोना  वायरस के डर से पार्वती का कोई भी रिश्तेदार या उसके समाज का कोई भी व्यक्ति उनके घर नहीं पहुंचा।  घंटों इंतजार करने के बाद शवेता ने समाजसेवी इनायत अली को फोन करके अपनी मां पार्वती की मृत्यु की सूचना देने के साथ ही उनसे सहायता मांगी और बताया कि कुछ रिश्तेदारों ने शहर से बाहर होने का बहाना बनाकर आने से मना कर दिया। इस मुश्किल घड़ी में खुद को अकेला महसूस कर रही शवेता की आंखों से आंसू निकल रहे थे। तब शवेता ने इनायत अली को फिर फोन करके कहा भैया मां का अंतिम संस्कार कैसे होगा कोई रिश्तेदार नहीं आ रहा है । मां को अकेली कांधा कैसे दूंगी इस पर इनायत अली ने कहा तुम चिंता ना करो दीदी मैं आता हूं। इनायत अली अपने साथियों के साथ शवेता के घर पहुंच गए। शवेता तथा इनायत अली, अल्तमस राईन ,रियासत अली, दीपक निगम ने कांधा दिया परंतु मुक्तिधाम में भी काफी इंतजार करने के बाद कोई रिश्तेदार नहीं आया तो शवेता ने नम आंखों से अपनी मां को मुखाग्नि दी।
श्री मंसूरी ने कहा इस हृदय विदारक घटना के बाद मैं समाज के ठेकेदारों और हिंदू मुस्लिम का ढोल पीटने वाले उन संगठनों के लोगों से पूछना चाहता हूं कि जब ऐसी संकट की घड़ी होती है तब उनकी आत्मा क्यों मर जाती है? उन्होंने कहा जहां दुर्गा की अर्थी को इमरान और उसके साथी कांधा देते हैं वही पार्वती की अर्थी को इनायत अली और उनके साथी ही कांधा देकर मुक्तिधाम तक पहुचा कर अंतिम संस्कार करवाते हैं यही पैगम्बर मोहम्मद सहाब की शिक्षा है। यही इस्लाम का है पैगाम  ,


यही  है ख्वाजा का असली हिंदुस्तान


जहां हिंदू की अर्थी को कंधा देता मुसलमान